नई दिल्ली, 22 अगस्त: केंद्र सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्रालय ने मिडिया में छपी गेहूं आयात (India Wheat Import) की खबरों का खंडन करते हुए कहा है कि “गेहूं आयात की कोई योजना नहीं है. देश में गेहूं का पर्याप्त भंडार है।” दरअसल, ब्लूमबर्ग में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इस बार गर्मी की वजह से गेहूं के उत्पादन में कमी और बढ़ती कीमतें सरकार को अनाज आयात पर विचार करने के लिए मजबूर कर सकती हैं। ब्लूमबर्ग में छपी इस खबर का खंडन करते हुए खाद्य विभाग ने आज रविवार 21 अगस्त को एक ट्विटर पोस्ट के जरिये जवाब देते हुए कहा की “भारत में गेहूं आयात करने की ऐसी कोई योजना नहीं है। हमारी घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए देश के पास पर्याप्त स्टॉक है और @FCI_India सार्वजनिक वितरण के लिए पर्याप्त स्टॉक है।”
सरकार ने जारी किये गेहूं उत्पादन के आकड़े
भारत ने बुधवार को देश में इस बार गेहूं उत्पादन के अपने बढ़े हुए आंकडे़ पेश किये, जबकि अन्य पूर्वानुमानकर्ता और व्यापारी इस बार देश में हीटवेव के कारण गेहूं का उत्पादन कम होने की आशंका व्यक्त कर रहे है। सरकार ने कृषि मंत्रालय द्वारा जारी अपने नए एस्टिमेट में कहा कि दुनिया के दूसरे सबसे बड़े अनाज उत्पादक ने 2022 में 106.84 मिलियन टन गेहूं की कटाई की, जो पिछले एस्टिमेट 106.41 मिलियन टन से अधिक है। पहले यह अनुमान 111 मिलियन टन का था।
हाल ही में लोकसभा में लिखित जवाब में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि 1 जुलाई 2022 तक देश का गेहूं स्टॉक 285.10 लाख मिट्रिक टन है। मिनिमम बफर कोटा 275.80 लाख टन का है। साथ में उन्होंने यह भी कहा कि किसानों से सरकारी खरीद में कमी आई है, क्योंकि बाजार से किसानों को ज्यादा कीमतें मिल रही हैं।
उत्पादन में कमी की आशंका
इस साल के शुरू गेहूं की फसल पर मौसम की मार पड़ी। प्रचंड गर्मी के कारण गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ। फरवरी के अंत में रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण कर दिया जिसके बाद विश्व बाजार में गेहूं की किल्लत हो गई और भारत ने भर-भर कर निर्यात शुरू कर दिया। निर्यात बढने के कारण घरेलू मार्केट में इसकी कमी हो गई थी, जिसके कारण कीमत अब तक के उच्च स्तर पर पहुंच गई। इसके अलावा लू के कारण भी पैदावार को नुकसान हुआ जिससे भी कीमत को बल मिला। बता दें कि रूस और यूक्रेन दुनिया का दो बड़ा गेहूं आपूर्तिकर्ता देश है।
गेहूं की कीमतों में आया उछाल
अभी बार गेहूं की कीमतों जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। गेहूं कीमत में तेजी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गेहूं की कीमत के लिए इंदौर मंडी का भाव अहम माना जाता है। यूक्रेन पर हमले से पहले गेहूं का भाव जहां 2000 से 2100 रुपए क्विंटल था, जो हमले के बाद बढ़कर 2500 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था। अभी भी यह उच्च स्तर पर बना हुआ है। सरकार ने गेहूं के लिए एमएसपी 2015 रुपए प्रति क्विटल तय की है, जबकि बाजार का औसत भाव 2400 रुपए प्रति क्विंटल के करीब है। थोक में गेहूं की कीमत बढ़ने पर सरकार ने निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी।
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गेहूं और इसके उत्पादों के निर्यात पर लगी थी रोक
जब सरकार ने गेहूं निर्यात पर बैन लगाने का फैसला किया था तब कहा गया था कि ऐसा घरेलू जरूरतों और आस-पड़ोस के देशों की जरूरतों को पूरा करने के मकसद से किया गया है। पहले गेहूं निर्यात पर बैन लगाया गया उसके बाद में सरकार ने गेहूं से बने अलग-अलग खाद्य पदार्थ जैसे आंटा, मैदा समेत कई अन्य तरह के खाद्य पदार्थ के निर्यात पर भी रोक लगाई थी।