Donald Trump Tariffs News In Hindi: 2 अप्रैल का दिन जैसे ही आया, दुनिया भर की नजरें अमेरिका पर टिक गईं। महीनों से चल रही अटकलों का अंत हुआ और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए टैरिफ की घोषणा कर दी। यह खबर सुनते ही वैश्विक बाजारों में हलचल मच गई। ट्रंप ने इसे “डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ” का नाम दिया और भारत, चीन, पाकिस्तान जैसे देशों को इस आर्थिक झटके का सामना करना पड़ रहा है। तो आखिर यह टैरिफ क्या है और इसका हमारे लिए क्या मतलब है? चलिए, इसे आसान भाषा में समझते हैं।
टैरिफ का ऐलान: किस देश पर कितना बोझ?
अमेरिका ने इस बार अपने व्यापारिक रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करने की ठानी है। ट्रंप ने चीन से आने वाले सामान पर 34% टैरिफ लगा दिया, जो सबसे ज्यादा है। वहीं, भारत पर 26% और पाकिस्तान पर 29% का शुल्क तय किया गया। यूरोपीय यूनियन को 20% और यूनाइटेड किंगडम को सिर्फ 10% टैरिफ का सामना करना होगा। मतलब साफ है – अमेरिका अब उन देशों पर सख्ती बरत रहा है, जो उसके साथ व्यापार में ज्यादा फायदा उठाते हैं।
ट्रंप का तर्क: “हम क्यों ढोएं दुनिया का बोझ?”
ट्रंप का कहना है कि अमेरिका लंबे समय से कई देशों को सब्सिडी देता आया है। उनके बिजनेस को जिंदा रखने में मदद करता है। लेकिन अब वे इस “एकतरफा बोझ” को ढोने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इसी वजह से अमेरिका का व्यापार घाटा बढ़ता गया और कर्ज का पहाड़ खड़ा हो गया। अब वक्त आ गया है कि हर देश अपने पैरों पर खड़ा हो और अमेरिका अपने लोगों को प्राथमिकता दे।
ऑटोमोबाइल पर बड़ा दांव: 25% टैरिफ की मार
विदेशी गाड़ियों पर भी ट्रंप ने सख्ती दिखाई है। सभी आयातित ऑटोमोबाइल पर 25% टैरिफ लगा दिया गया। उनका तर्क है कि भारत जैसे देश अपनी मोटरसाइकिलों पर 70% तक टैरिफ वसूलते हैं, जबकि अमेरिका सिर्फ 2.4% लेता है। इस असंतुलन को ठीक करने के लिए यह कदम उठाया गया। ट्रंप का मानना है कि इससे अमेरिकी उद्योग और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
भारत पर 26% टैरिफ: चिंता की बात या राहत?
भारत के लिए यह खबर मिली-जुली है। 26% टैरिफ सुनने में भारी लगता है, लेकिन चीन (34%) और पाकिस्तान (29%) की तुलना में हमारा बोझ थोड़ा कम है। फिर भी, इसका असर भारतीय निर्यात पर पड़ना तय है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका पूरा प्रभाव आने वाले महीनों में विश्लेषण से ही सामने आएगा। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि भारत का टैरिफ भविष्य में कम हो सकता है, जो एक उम्मीद की किरण है।
कौन से देश सबसे ज्यादा प्रभावित?
अमेरिका ने कुछ देशों को खासा निशाना बनाया है। कंबोडिया पर 49%, वियतनाम पर 46%, और म्यांमार पर 44% टैरिफ लगाया गया है। ये आंकड़े बताते हैं कि विकासशील देशों को इस नीति से बड़ा झटका लग सकता है। वहीं, श्रीलंका, बांग्लादेश और थाईलैंड जैसे देश भी 36-44% के दायरे में हैं। साफ है कि ट्रंप की यह रणनीति गरीब देशों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है।
Tariffs List

कम टैरिफ वाले देश: किसे मिली राहत?
सभी देशों पर सख्ती नहीं बरती गई है। यूरोपीय यूनियन (20%), जापान (24%), और दक्षिण कोरिया (25%) जैसे विकसित देशों पर अपेक्षाकृत कम टैरिफ है। इजरायल और फिलीपींस पर 17% और नॉर्वे पर 15% शुल्क लगा है। यूनाइटेड किंगडम, ब्राजील और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश 10% टैरिफ की सूची में हैं। यह दिखाता है कि अमेरिका अपने करीबी सहयोगियों के साथ नरमी बरत रहा है।
भारत के लिए आगे की राह
भारत पर 26% टैरिफ का असर कितना गहरा होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन इतना तय है कि निर्यातकों को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत सरकार इस मुद्दे पर अमेरिका से बातचीत कर सकती है। अगर टैरिफ कम होता है, तो यह हमारे व्यापार के लिए अच्छी खबर होगी। लेकिन अभी “इंतजार और देखो” की नीति ही कारगर लगती है।
ट्रंप की सोच: अमेरिका फर्स्ट, बाकी लास्ट?
ट्रंप का यह कदम उनकी “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा है। वे मानते हैं कि पिछले नेताओं की गलतियों ने देश को कमजोर किया। अब वे इस असंतुलन को ठीक करना चाहते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह नीति वैश्विक व्यापार को नुकसान पहुंचाएगी? कई अर्थशास्त्री चेतावनी दे रहे हैं कि इससे कीमतें बढ़ सकती हैं और सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
निष्कर्ष: टैरिफ वार का भविष्य
अमेरिका का यह टैरिफ वार न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा बदलाव है। यह देखना दिलचस्प होगा कि देश इस चुनौती का जवाब कैसे देते हैं। क्या भारत अपनी स्मार्ट कूटनीति से इस संकट को अवसर में बदल पाएगा? ये देखना दिलचस्प होगा।