नई दिल्ली, 20 जुलाई: केंद्र सरकार ने गुरुवार को गैर-बासमती चावल (Non-Basmati Rice Ban) के निर्यात पर रोक लगा दी है। सरकार ने यह फैसला खुदरा कीमतों में हो रही बढ़ोतरी पर काबू पाने के लिए लिया है। ग़ौरतलब है कि देश में अबकी बार मानसून में देरी से धान की फसल को नुकसान हुआ है, जिससे उत्पादन में कमी आने की संभावना बढ़ गई है। वहीं पिछले कुछ हफ्तों से उत्तरी हिस्सों में भारी बारिश के कारण पंजाब और हरियाणा सहित अन्य धान उत्पादक राज्यों में फसलों को भारी नुकसान हुआ है ।
ऐसे में सरकार ने गुरुवार को गैर-बासमती चावल की शिपमेंट पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने की घोषणा कि है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन के अनुसार, ‘गैर-बासमती सफेद चावल (अर्ध-मिल्ड या पूरी तरह से मिल्ड चावल, चाहे पॉलिश किया हुआ हो या नहीं) की निर्यात नीति को मुक्त से प्रतिबंधित कर दिया गया है।’ हालांकि, इसमें कहा गया है कि इस चावल की खेप को कुछ शर्तों के तहत निर्यात करने की अनुमति दी जाएगी।
खाद्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि गैर-बासमती उसना चावल और बासमती चावल की निर्यात नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। कुल निर्यात में दोनों किस्मों का हिस्सा बड़ा है। देश से निर्यात होने वाले कुल चावल में गैर-बासमती सफेद चावल की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है।
कुछ शर्तों के साथ चावल के निर्यात की रहेगी अनुमति
1. यदि इस अधिसूचना के पूर्व जहाज पर गैर बासमती चावल की लोडिंग आरंभ हो गई है तो उसका शिपमेंट किया जा सकता है।
2. यदि इस अधिसूचना के जारी होने से पहले शिपिंग बिल भरा गया हो और जहाज पहले ही भारतीय बंदरगाहों पर आ चुका हो, उसे बर्थ मिल चुका हो या वह लंगर डाल चुका हो और उसे रोटेशन नम्बर आवंटित कर दिया गया हो। ऐसे जहाजों में चावल की लोडिंग की स्वीकृति सम्बन्धित बन्दरगाह अधिकारियों द्वारा अभिपुष्टि करने के बाद ही दी जाएगी।
3. इस अधिसूचना से पूर्व यदि गैर बासमती चावल की खेप को कस्टम विभाग को सुपुर्द किया गया हो और उनके ‘सिस्टम’ में वह रजिस्टर्ड हो चुका हो या अगर इस अधिसूचना से पूर्व निर्यात उद्देश्य वाले गैर बासमती चावल की खेप कस्टम्स स्टेशन में पहुंच चुकी हो और उस कस्टम्स स्टेशन के संबंधित कस्टोडियन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में पंजीकृत हो चुका हो।
4. इसके अलावा अन्य देशों को उनकी खाद्य सुरक्षा की जरूरतों को पूरा करने के लिए और उन देशों की सरकारों द्वारा किए जाने वाले अनुरोध के आधार पर भारत सरकार द्वारा प्रदत्त अनुमति के आधार पर चावल निर्यात की स्वीकृति होगी।