Raasta Kholo Abhiyan: जैसा की हम सालों से देखते आ रहे हैं कि राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में हर साल सैकड़ों झगड़े सिर्फ़ रास्तों पर अतिक्रमण को लेकर होते हैं? पंचायतों से लेकर थानों तक, यह मुद्दा गाँवों की तरक्की में सबसे बड़ी रुकावट बना हुआ है। लेकिन अब राज्य की भजनलाल सरकार ने इस समस्या का समाधान निकालते हुए ‘रास्ता खोलो अभियान’ को पूरे प्रदेश में लागू करने का ऐलान किया है। यह सिर्फ़ सड़कें और गालियां खोलने की मुहिम नहीं, बल्कि ग्रामीणों के बीच सद्भाव बनाने और विकास की गंगा बहाने का संकल्प है।
नागौर से निकली वह चिंगारी जो बनी मिसाल
साल 2021 में नागौर के तत्कालीन जिला कलक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने एक अनोखी पहल की थी। उन्होंने गाँवों में वर्षों से बंद पड़े रास्तों को न सिर्फ़ खुलवाया, बल्कि नरेगा के तहत ग्रेवल सड़कें बनवाकर हज़ारों किसानों को राहत दिलाई। यह कामयाबी का वह मॉडल बना जिसने आगे चलकर अलवर और जयपुर जिलों में भी पैर पसारे। डॉ. सोनी के शब्दों में, “रास्ते सिर्फ़ जमीन के टुकड़े नहीं, बल्कि गाँव की एकजुटता की नसें होते हैं। इन्हें खोलना समाज को जोड़ने जैसा है।”
क्यों जरूरी है यह अभियान?
राजस्व विभाग के ताजा आँकड़े चौंकाने वाले हैं: राजस्थान के 70% ग्रामीण विवाद रास्तों के अतिक्रमण से जुड़े हैं। हरिसिंह मीना, शासन उप सचिव, राजस्व विभाग के मुताबिक, “गाँवों में नाले-नालियों से लेकर खेतों तक पहुँचने वाले रास्ते अवैध कब्जों की भेंट चढ़ गए। इससे न केवल आपसी झगड़े बढ़े, बल्कि स्कूल-हॉस्पिटल जैसी बुनियादी सुविधाएँ भी दूर हो गईं।”
सरकार की कार्ययोजना: कानून और तकनीक का तालमेल
- कानूनी पहलू: राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 की धारा 25 और 251ए के तहत सभी पुराने रास्तों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। यह कदम अतिक्रमणकर्ताओं पर कानूनी कार्रवाई को आसान बनाएगा।
- तकनीकी निगरानी: हर खुले रास्ते की वीडियोग्राफी और जीपीएस मैपिंग की जाएगी, ताकि भविष्य में विवाद न हो।
- जनभागीदारी: प्रत्येक बुधवार को अधिकारी ग्रामीणों के साथ बैठकर आपसी सहमति से समाधान निकालेंगे।
- मुख्य ग्राम, बाडिया, ढाणियां व मजरा को जोड़ने वाले रास्तों का राजस्व रेकॉर्ड में अंकन।
- कदीमी रास्तों का राजस्व रेकॉर्ड में अंकन।
- राजस्व रेकॉर्ड में दर्ज रास्ते, जो मौके पर बन्द हैं, उन्हें खुलवाना।
- नरेगा में निर्मित रास्तों का राजस्व रेकॉर्ड में अंकन।
- कृषि भूमियों पर आवागमन के लिए सार्वजनिक रास्तों का राजस्व रेकॉर्ड में अंकन।
एक महीने का अभियान, दशकों का फायदा
राजस्व मंडल के निर्देशानुसार, हर उपखंड अधिकारी को साप्ताहिक 10 मामले सुलझाने का लक्ष्य दिया गया है। नागौर के एक किसान रामस्वरूप जाट का कहना है, “पहले ट्रैक्टर तक खेत तक नहीं पहुँच पाता था। अब ग्रेवल सड़क बनने से फसल बाजार तक पहुँचाना आसान हो गया।” ऐसी ही कहानियाँ अब पूरे राजस्थान में दोहराई जाएँगी।